Page 80 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
भारत स्क ू ल अगरोद: प्राथममक मशक्षा की ओर एक कदम
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(वर् 1999)
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गुरुकुल मशक्षा मवकास समममत का गठन और उसक बाद मशवम
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इंस्टीट्यूट आइसक्ट की सफल स्थापना ने हमार सपनों को एक नई उडान दी थी।
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हम यह एहसास हो गया था मक ग्रामीण अंचल म मशक्षा की बहुत बडी
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आवश्यकता है। जहााँ मशवम इंस्टीट्यूट क माध्यम स हम युवाओं को तकनीकी
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मशक्षा से जोड रहे थे, वहीं मेर मन में एक और मवचार आकार ले रहा था—ज्ञान
की नींव को और भी मजबूत करने का। मने यह महसूस मकया मक यमद हम बच्चों
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को प्राथममक स्तर पर ही अच्छी मशक्षा प्रदान कर, तो उनका भमवष्य और भी
उज्ज्वल हो सकता है। इसी सोच क साथ, गुरुकुल मशक्षा मवकास समममत ने एक
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और महत्वपूण कदम उठाने का फसला मकया।
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वर् 1999 में, हमने अपने ममशन को एक नई मदशा देत हुए 'भारत स्क ू ल
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अगरोद' का शुभारंभ मकया। यह स्कूल टोंक खुदष से लगभग 5 मकलोमीटर की
दूरी पर मस्थत अगरोद ग्राम में
स्थामपत मकया गया। यह गााँव
एक ऐसे क्षेत्र में था जहााँ
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गुणवत्तापूण प्राथममक मशक्षा
की बहुत कमी थी। स्कूल म ें
हमने कक्षा 1 से 8 तक की
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प्राथममक एवं माध्यममक मशक्षा की शुरुआत की। हमारा उद्देश्य मसफ बच्चों को
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अक्षर ज्ञान देना नहीं था, बमल्क उन्हें ऐस संस्कार और मशक्षा देना था मजसस व े
एक मजम्मेदार और जागऱूक नागररक बन सक।
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