Page 79 - आनंद से अनार तक
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                                आत्मकथा -आनंद स  अनार तक

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                                                          े
              जनपद पंचायत टोंक खुदष क अध्यक्ष थे, ने अपने हाथों स इस संस्थान का उद्घाटन
              मकया। उनकी उपमस्थमत ने हमार प्रयास को आमधकाररक मान्यता और गौरव
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              प्रदान मकया। मवशेर् अमतमथ क ऱूप में श्री सज्जन मसंह ठाक ु र, मेर बड भाई, श्री
              भगवान मसंह क ु शवाह, श्री जगदीश गलोमदया, श्री उमेश श्रीवास्तव और श्री
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              सुंदरलाल  जैन  जस  सम्मामनत  व्यमि  मौजूद  थे।  इन  सभी  क  समथषन  और
              उपमस्थमत ने हमें यह मवश्वास मदलाया मक हम सही रास्ते पर हैं।
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                     मशवम इंस्टीट्यूट म, हमने शुरुआत म क ं प्यूटर मशक्षण क मडप्लोमा और
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              प्रमाण पत्र क कोसष शाममल मकए थे। हमारा उद्देश्य था मक हम सरल और प्रभावी
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              तरीक स क ं प्यूटर क बुमनयादी ज्ञान को ग्रामीण युवाओं तक पहुाँचा सक। हमारा
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              लक्ष्य कवल उन्हें मडग्री देना नहीं था, बमल्क उन्हें आत्ममनभषर बनाना और उनक
              अंदर आत्ममवश्वास पैदा करना था।
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                     इंस्टीट्यूट क शुभारंभ क बाद, हम बहुत खुशी हुई मक हमार क्षत्र क
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              युवाओं ने इस अवसर को सहर् स्वीकार मकया। व बडी संख्या म नामांकन कराने
              आए। यह दशाषता था मक ग्रामीण युवा भी तकनीकी मशक्षा को लकर मकतने
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              उत्सामहत थे। मशवम इंस्टीट्यूट, मर और मर सामथयों क मलए कवल एक संस्थान
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              नहीं, बमल्क एक ऐसा मंच बन गया था, जहााँ हम समाज में एक सकारात्मक
              बदलाव ला सकते थे।
                     आज जब म उस मदन क बार म सोचता ह ाँ, तो मर मन म संतोर् और
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              कृतज्ञता का भाव उमड आता है। मशवम इंस्टीट्यूट का शुभारंभ कवल एक
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              इमारत का खुलना नहीं था, बमल्क यह मर जीवन क ममशन की शुरुआत थी,
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              मजस मर सामथयों और पररवार क समथषन स एक नई उडान ममली। यह संस्थान
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              आज भी मेर मलए एक प्रेरणा का स्रोत है, जो मुझ याद मदलाता है मक एक छोट  े
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              स सपने की शुरुआत भी एक बड आंदोलन का ऱूप ल सकती है।
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