Page 86 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स  अनार तक
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              एक भव्य भवन और कुछ भूखंड खरीदे। यह मसफ एक मवत्तीय मनवेश नहीं था,
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              बमल्क यह हमार समुदाय क प्रमत हमार समपषण और अटूट मवश्वास का प्रमाण
              था। यह एक ऐसा कदम था मजसने हमार ममशन को एक नया आयाम मदया और
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              हमें यह मवश्वास मदलाया मक हम अपने सपनों को हकीकत में बदल सकते हैं।
              भारत हाई स्कूल का शुभारंभ हमार मलए मसफ एक नई इमारत का उद्घाटन नहीं
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              था, बमल्क यह हमार ममशन की सफलता का एक और कदम था। इस स्कूल क
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              माध्यम से हमने सैकडों बच्चों को उच्च मशक्षा प्राप्त करने का अवसर मदया। हमने
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              उन्हें न कवल पाठ्यक्रम पढाया, बमल्क उनक व्यमित्व क मवकास पर भी ध्यान
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              मदया। हमारा मानना था मक मशक्षा मसफ ज्ञान तक सीममत नहीं होती, बमल्क यह
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              एक बच्चे क सवािंगीण मवकास म महत्वपूण भूममका मनभाती है।
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