Page 89 - आनंद से अनार तक
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                                आत्मकथा -आनंद स  अनार तक

                     सहयोगी मशक्षक: मजन्होंन मेर जीवन को मनखारा
                                                  े
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                                      (सन 2001 से 2015 तक )
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                                                                     ष
                     शासकीय माध्यममक मवनॏयालय, गोरवा म संमवदा मशक्षक वग-2 क ऱूप
                                                                         े
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              में मेरी नई यात्रा, मसफ एक नौकरी नहीं थी, बमल्क यह मेर जीवन का एक और
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                                                                        े
              महत्वपूण अध्याय था। एक उनॏयमी स मशक्षक बनने का मरा यह सफर मर मलए
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                                                                       े
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              नया था, और इस सफर म मुझ कुछ ऐस सहयोगी मशक्षक ममल, मजन्होंने मेर  े
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              अंदर मछपी मशक्षक की भावना को मनखारा। इन मशक्षकों ने मुझ न मसफ अपना
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              काम बेहतर तरीक से करना मसखाया, बमल्क मुझ एक बहतर इंसान भी बनाया।
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              उनक प्रमत मेरा आभार व्यि करने क मलए शब्द कम पड जाते हैं।
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                     इस यात्रा में मेरी सबसे अच्छी दोस्त और सहयोगी, श्रीमती साधना
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                                                                            े
              चौहान का नाम सबस पहल आता है। उन्होंने मुझ एक मशक्षक क ऱूप म मर  े
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                                                                         ें
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                                                     शुरुआती  मदनों  म  बहुत
                                                                      ें
                                                                   े
                                                     सहारा मदया। उनक साथ काम
                                                         े
                                                     करत हुए मने सीखा मक कस  े
                                                                          ै
                                                               ैं
                                                                 ष
                                                     बच्चों को मसफ मकताबी ज्ञान
                                                                            े
                                                     ही  नहीं,  बमल्क  जीवन  क
                                                     नैमतक मूल्यों की भी मशक्षा दी
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              जाती है। उनकी ममत्रता और उनका सहयोग मेर मलए मकसी प्रेरणा से कम नहीं
              था।
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                     इसक बाद, म उन महानुभावों का मजक्र करना चाह ाँगा, मजन्हें मैं अपना
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                                    े
              प्रेरणा स्रोत मानता ह ाँ। सबस अनुभवी और मर गुरु समान, श्री जगदीश वमाष सर
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              ने मुझ मसखाया मक एक मशक्षक का कतव्य मसफ पढाना नहीं, बमल्क अपने छात्रों
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                                                   ष
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              और मवनॏयालय क प्रमत पूरी तरह सममपषत होना है। उनका अनुभव और ज्ञान मर  े
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