Page 92 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
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जीवन कसा बदल जाएगा। मेर मन में यह भी मवचार आता था मक मेर मपता क
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जाने क बाद, मर पररवार म एक नई पीढी की शुरुआत होने वाली है।
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आमखरकार, वह शुभ मदन आ ही गया। 29 अगस्त, 2001 को मेर बड े
बट का जन्म हुआ। उस पल को शब्दों म बयां करना मुमश्कल है। उसकी पहली
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मकलकारी सुनकर मर अंदर एक ऐसी खुशी का सलाब उमड पडा था, मजसे मैंने
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पहल कभी महसूस नहीं मकया था। उस मदन मुझ एहसास हुआ मक जीवन का
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असली अथष क्या होता है। मुझ लगा जस मर जीवन क सार संघर्ों, त्यागों और
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प्रयासों का फल आज मुझ ममल गया है। मर घर म एक नया महमान नहीं, बमल्क
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एक नया जीवन आया था।
हमने उसका रामश का नाम क ुं वर योगेंि मसंह ठाक ु र रखा, और घर का
नाम उसे प्यार से राज
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बुलाया। ये नाम मसफ नाम
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नहीं थे, बमल्क मेर और
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मेर पररवार क मलए
आशा, गौरव और एक नई
शुरुआत का प्रतीक थे।
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राज क आने से हमार घर
में एक नई रौनक आ गई
थी। उसकी मासूम मुस्कान
और उसकी छोटी-छोटी
शरारतें हमार जीवन को
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खुमशयों स भर देती थीं।
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