Page 93 - आनंद से अनार तक
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                                आत्मकथा -आनंद स  अनार तक

                     राज का जन्म मर मलए मसफ व्यमिगत खुशी का कारण नहीं था, बमल्क
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              इसने मेर पेशेवर जीवन को भी एक नया आयाम मदया। एक सरकारी मशक्षक और
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              एक मशक्षण संस्थान क संचालक क ऱूप म, मेरा ममशन हमेशा से ही अगली
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              पीढी को सशि बनाना था। लेमकन राज क आने क बाद, मेरा यह ममशन और
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              भी ज़्यादा व्यमिगत और महत्वपूण हो गया था। अब म मसफ दूसरों क बच्चों
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              को ही नहीं पढा रहा था, बमल्क मैं अपने बेट क मलए भी एक बेहतर भमवष्य का
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              मनमाषण कर रहा था। उसकी आाँखों में मैं अपने सार सपनों को मफर से देख सकता
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              था।
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                     आज जब म पीछ मुडकर देखता ह ाँ, तो मुझ यह एहसास होता है मक
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              2001 म ममली सरकारी नौकरी और मर अन्य प्रयासों क मुकाबल, मेर बेट का
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                                                                         े
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              जन्म मरी सबस बडी उपलमब्ध थी। इसने मुझ एक नई पहचान दी—एक मपता
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              की पहचान—और मेर जीवन को एक नई मदशा और एक नया उद्देश्य मदया।


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