Page 91 - आनंद से अनार तक
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आत्मकथा -आनंद स अनार तक
एक नई उपलमब्ध: मेर बड बेट का जन्म
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(29 अगस्त, 2001)
वर् 2001 मेर जीवन का एक ऐसा साल था जो उपलमब्धयों और
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बदलावों स भरा हुआ था। एक तरफ मने एक उनॏयमी स मशक्षक बनने का
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महत्वपूण मनणय मलया, मजसने मेर जीवन की मदशा बदल दी। मैं अपने मशक्षण
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संस्थानों क साथ-साथ एक सरकारी मशक्षक क ऱूप में भी अपनी मजम्मेदाररयों
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को मनभा रहा था। लमकन इस साल की सबस बडी और सबस महत्वपूण ष
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उपलमब्ध इन सब से कहीं ऊपर थी। यह एक ऐसा पल था मजसने मेर जीवन को
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पूणता और एक
गहरा अथष
मदया। यह पल
था मेर बड बेटे
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का जन्म।
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मपता बनना एक
ऐसा अनुभव है
मजसकी तुलना
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मकसी और उपलमब्ध से नहीं की जा सकती। जब मैं अपने बेट क आगमन का
इंतजार कर रहा था, तो मर मन म एक अजीब सी खुशी, उत्सुकता और थोडी
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घबराहट भी थी। मेर पररवार, मवशर्कर मरी मााँ एवं पत्नी ममता, क मलए यह
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एक बहुत ही भावुक और महत्वपूण समय था। हम अपने आने वाल बच्चे क
सपनों में खोए रहते थे, यह सोचते थे मक वह कसा होगा, उसक आने से हमारा
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